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शनिवार, 1 जनवरी 2011

Pani KI Khoj

               करोडो के तालाब खुदे , पानी का पता ही नहीं

        अमर उजाला टीम के व्यापक सर्वे में यह पता चला है कि तालाब तो काफी खुदे लेकिन उनमे पानी नहीं है . तालाब का काम एक सामान्य समझ की जरुरत मांगता है कि तालाब तो खुदे पर उसमे पानी कहा से आएगा . उसका रास्ता भी देखना होगा . सामान्यतया जो तालाब मनरेगा में खुदे है उनमे कात्च्मेंट का ध्यान नहीं रखा गया है उससे हो यह रहा है कि तालाब सूखे पड़े है   .                                    
केंद्र सरकार कि राष्ट्रीय सलाहकार परिषद् मनरेगा जैसी महत्वकांक्षी योजना को दुसरे चरण में शहरो में भी लागू करने के लिए बेताब दिख रही है , लेकिन इससे पहले चरण में जिस तरीके से काम हो रहा है उससे गाँव  में बड़े बदलाव कि उम्मीद बेमानी लग रही है . करोडो रूपये खर्च करके सैकड़ो पोखरे एवं तालाब खुदे लेकिन उसमे पानी भरने के लिए महीनो से बरसात का इंतजार हो रहा था .कारण कि मनरेगा में पानी भरने का बजट नहीं है. सड़के बनी पर गरीबो के रस्ते अब  भी कच्चे है . हां मजदूरो कि अहमियत जरूर बढ़ी है अब दुसरे जगह भी उन्हें डेढ़ सो  रूपये कि मजदूरी मिल जाती है . परन्तु साल भर काम न मिलने के कारण कोई खास बदलाव नहीं आया है .
        गोरखपुर से १५ कि मी की दुरी पर भौअपरगाव है यहाँ हरिजन बस्ती , शिव मंदिर और उत्तर टोला के पास के पोखरों पर  मनरेगा के लाखो  रूपये खर्च हुए है पर पानी नहीं भरा गया , शिव मंदिर के पास के प्राचीन पोखरा के लिए पूर्व सांसद राज नारायण पासी ने भी १०.६ लाख रूपये दिए थे . अब मनरेगा के ३.६२ लाख रूपये भी इसी पर खर्च हुए पर पानी के लिए महीनो से मानसून का इंतजार हो रहा है . ग्राम प्रधान  का कहना है की पानी भरने का इंतजाम मनरेगा में है ही नहीं . 
         वाराणसी जिले में भी ५७६ आदर्श तालाब खुदे है मुख्य विकास अधिकारी  शरद कुमार सिंह का दावा है कि तालाबो में पानी के लिए नाहर के किनारे २७ तथा नलकूप के किनारे १६४ तालाबो में पानी है. परन्तु बसानी कि  ग्राम प्रधान रेखा पटेल  कहती है कि पानी भरने का बजट ही नहीं है . 
 झाँसी जिले के मोठ ब्लाक में पाच तालाब दो साल बाद भी सूखे है . किसानो का कहना है कि जिस उम्मीद से उन्होंने जमीन दी उस पर पानी फिर गया मचली पालन का सपना तो सपना ही रहा गया .मनरेगा के तहत काम देने कि आनिवार्यता के चलते जिले के ज्यद्यातर इलाको में सडको पर लेप लगाकर खानापूर्ति कि जा रही है .
     
                                                                                           लेखक - विश्व वैभव शर्मा 
                                                                                       साभार- अमर उजाला ,  न्यू डेल्ही


     






       

4 टिप्‍पणियां:

  1. Pani to samsya hai hi but bada brashtchar yah hai ki
    मनरेगा के तहत काम देने कि आनिवार्यता के चलते जिले के ज्यद्यातर इलाको में सडको पर लेप लगाकर खानापूर्ति कि जा रही है .

    AAb sarkAR KO YAHA YAHI PROGRAMME ME TRANSPARENCY BARATNE KI AWASYAKTA HAI NAHI TO JANTA KI GADHI KAMAI KA TAX JO SABHI DETE HAI KO BARBAD KIYA JA RAHA HAI ISLIYE SABHI KO IS PAR BOLNE KI AWASYAKTA HAI ,,,,,,, AI REQUEST U KI AAP BHI AAPNE BLOG ME IS TARAH KI BAT UTHAYE KI HAMARE KAMAI KO IS TARAH SE BARBAD KYU KAR RAHI HAI SARKAR...........

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  2. Aap Pani K liye Kya Kar Rahay Hai Aur , 2-Vaygaynic Dwra Kaha Ja Raha HAi Ki 2012 Main Duniya Nast Ho Jayegi Aur Har Jagah Pani Hi Pani Hoga To Pani Ki Samsya Kaha Hai Bahi Aur Dusri Taraf Yahi Vayganic Log Kah Rahay Hai Ki 2020 Tak Sabhi Log Motay Ho Jayengay To Kya Sach Hai Aur Kya Ghout Hai Ye to Ab NGO Hi Batangey Please Revart My Answar My EMAIL ID sunny9336896515@gmail.com,pintu.rajpoot@rediffmail.com

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  3. aaj kal fir wahi charch ho rahi hai hamaraay desh k sincetist salay sab pagal ho chukay hai in logo ka kahna hai ki 15.06.2011 ko chandra grahan jo laga tha thik waisha he chandra grahan 29 nov 2053 main fir se dobara lagega....................
    to main aap se janana cahta hu ki kya ye sambhaw hai ...............................

    ham aap ki pani ki samashya dekhay ya fir duniya ki sochay ya fir chandra grahan........................ hay ram kya hoga es desh ka

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