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गुरुवार, 6 जनवरी 2011

एरे-गेरे राजनीती की दुकान सजाये बैठे है...........


एरे-गेरे राजनीती की दुकान सजाये बैठे है, जिसको देखो जहाँ-तहाँ पर जाम लगाये बैठे है. 


आरक्षण के मुद्दे पर बंधक बन गया राजस्थान, आना-जाना दूभर हो गया आमजन हुआ परेशान, 
रेल-पटरियों पर देखो गुर्जेर टेंट गढाए बैठे है, जिसको देखो जहाँ-तहाँ .................. 
कॉलेज... में गुट बने हुए है ऐसी पढाई होती है, जब देखो लात और घूंसे बिन बात लड़ाई  होती है,
अपना प्रभाव जमाने हेतु हड़ताल कराए बैठे है, जिसको देखो जहाँ-तहाँ............... 
आयकर की रेड पड़े तो व्यापारी कर दे हड़ताल, मिलावट के सेम्पल लेना बन गया अब जी का जंजाल, 
कही पे पुतले और कही पे टायर जलाये बैठे है, जिसको देखो जहाँ-तहाँ पर जाम लगाये बैठे है.


         


                                                                                                 विश्व वैभव शर्मा 

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